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टॉक जर्नलिज्म : अभी भी शर्मनाक स्थिति में है इंटरनेट पर मौजूद हिंदी भाषी कन्टेंट : राहुल देव

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जयपुर। राजधानी जयपुर के कूकस स्थित फेयरमांउट होटल में चल रहे तीन दिवसीय आयोजन 'टॉक जर्नलिज्म' के दूसरे दिन आज कई महत्वपूर्ण सैशन आयोजित किए गए। इस दौरान मीडिया जगत की कई नामचीन शख्सियतों ने वर्तमान दौर में दबलती तकनीक के साथ पत्रकारितों के बदलते आयामों के बारे में अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही इन सैशंस में मौजूद लोगों के सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। इसके अतिरिक्त गूगल, ट्विटर समेत कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से जर्नलिज्म में कार्य करने नफा-नुकसान और चुनौतियों के बारे में भी चर्चा की गई।

शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय 'टॉक जर्नलिज्म' आयोजन के दूसरे दिन शनिवार को मीडिया जगत की कई नामचीन शख्सियतों के साथ साथ एवियेशन, गूगल, ट्विटर जैसी टेक्निकल बेस कंपनियों के क्षेत्र एवं माध्यम से जर्नलिज्म करने के फायदों एवं नुकसानों के साथ ही चुनौतियों एवं सम्भावनाओं के बारे में भी चर्चा की गई। मीडिया जगत से जुड़ी शख्सियतों में बरखा दत्त, राहुल देव, रिषी दरड़ा, शेखर गुप्ता, सागरिका घोष, राजदीप सरदेसाई, प्रफुल्ल केटकर समेत कई हस्तियों ने वर्तमान दौर में पत्रकारिता के बदलते आयामों एवं माध्यमों के बारे में बातचीत की।

वर्तमान समय में तकनीक के बदलते दौर के अन्दर जर्नलिज्म की चुनौतियों एवं सम्भावनाओं के बारे में जहां मीडिया जगत से जुड़े लोगों ने बातचीत की, वहीं तकनीक के क्षेत्र गूगल, ट्विटर जैसे क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी जर्नलिज्म के बदलते आयामों, चुनौतियों एवं सम्भावनाओं के बारे में चर्चा की। इसके साथ ही गूगल न्यूज लैब और कम्यून वर्कशॉप भी आयोजित की गई होगी, जिसमें गूगल न्यूज के माध्यम से जर्नलिज्म के विषय में जानकारियों को साझा किया गया।

बरखा दत्त ने जर्नलिज्म में महिलाओं की भूमिका, योगदान एवं चैलेंजेज के बारे में बात करते हुए कहा कि उनसे अक्सर ये पूछा जाता है कि क्या वे शादीशुदा हैं या नहीं, जिसका वे अक्सर जवाब नहीं देतीं, क्योंकि ये सवाल अक्सर किसी महिला से ही किया जाता है, किसी आदमी से नहीं। वहीं पत्रकार राहुल देव ने आज के दौर में पत्रकारिता के बदलते आयामों की खामियों के बार में खुलकर विचार व्यक्त किए। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं विशेष रूप से हिंदी की सामग्री पर्याप्त एवं समुचित रूप से मौजूद नहीं होने पर भी अफसोस जताया।

गूगल आॅवर में आयोजित किए गए पैनल डिस्कशन में राहुल देव ने कहा कि भले ही बीते कुछ समय में फेसबुक, टविटर जैसी कई सोशन नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ने वाले यूजर्स की तादाद काफी बड़ी संख्या में बढ़ी हो। इन यूजर्स में भी हिंदी भाषी यूजर्स की तादाद काफी बड़ी मात्रा में है। लेकिन इन सबके बावजूद आज भी इंटरनेट पर हिंदी भाषा में पर्याप्त, समुचित एवं सटीक जानकारियां अंग्रेजी की अपेक्षा में ना के बराबर ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय के बारे में समुचित एवं सटीक जानकारी हिंदी में देने वाला कन्टेंट अभी भी शर्मनाक स्थिति में है।

वहीं उन्होंने ये भी कहा कि कुछ वरिष्ठ लेखकों को तकनीक के बारे में ठीक से जानकारी नहीं होने के कारण भी इंटरनेट पर हिंदी भाषी कन्टेंट का अभाव है। उन्होंने यहां तक भी कह डाला कि इंटरनेट पर सटीक एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म विकिपीडिया पर अभी तक भी हिंदी के जो पन्ने मौजूद है, उनकी संख्या एवं वहां मौजूद जानकारी के बारे में बोलने में भी शर्म महसूस होती है। इसलिए सिर्फ किसी भी वरिष्ठ लेखक ही नहीं, बल्कि हरेक उस शख्स को हिंदी में अपना कन्टेंट इंटर नेट पर मुहैया कराना चाहिए, जिसे किसी भी विषय पर समुचित एवं सम्पूर्ण जानकारी हो।



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