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रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ पुष्कर मेले का समापन समारोह

अजमेर। अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले का शनिवार को पारम्परिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
   
शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने समापन समारोह में कहा कि राज्य सरकार पुष्कर तीर्थ क्षेत्र के विकास के लिए संकल्पबद्ध है। राज्य सरकार द्वारा ब्रह्मा मन्दिर को अक्षरधाम की तर्ज पर विकसित करने के प्रयास किए जा रहे है। साथ ही सावित्री मन्दिर पर रोपवे की स्थापना की गई है। सावित्री मन्दिर के एन्ट्री प्लाजा को यात्रियों की सुविधा के अनुसार बनाया गया है। पुष्कर तीर्थ क्षेत्र के परिक्रमा पथ को विकसित किया जा रहा है।
   
उन्होंने कहा कि पुष्कर पुण्य धरती है। ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करने का महत्वपूर्ण कार्य पुष्कर से ही किया था। कार्तिक मास में पुष्कर तीर्थ का विशेष महत्व रहता है। एकादशी से पूर्णिमा तक इस क्षेत्र में आने वाले श्रृद्धालु पवित्र हो जाते है। श्रृद्धालुओं के पूण्य कर्मों में बढ़ोतरी हो जाती है। वे सब धन्य हो जाते है। पुष्कर की महिमा अपरम्पार बतायी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारतवर्ष के सम्पूर्ण तीर्थों में पुष्कर को तीर्थ राज माना गया है।
   
संसदीय सचिव एवं पुष्कर विधायक सुरेश सिंह रावत ने प्रशासन, पुलिस, पशु पालन विभाग, पर्यटन विभाग, पुष्कर मेला विकास समिति, पुष्कर नगर पालिका एवं मीडिया का आभार व्यक्त किया।
   
पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक एवं मेला अधिकारी डॉ. श्याम सुन्दर चन्दावत ने मेला रिपोर्ट प्रस्तुत की। समापन समारोह के अन्तर्गत पुष्कर शहर के विभिन्न विद्यालयों की लगभग 200 बालिकाओं ने चीरमी पर राजस्थानी समूह नृत्य प्रस्तुत किया। राजस्थान के विभिन्न स्थानों से आएं हुए कला जत्थों ने राजस्थानी लोक कलाओं को जीवंत किया। बारां के रूप सिंह के दल ने चकरी नृत्य, पुष्कर का कालबेलिया नृत्य, कम्मो का बाड़ा बाड़मेर का लाला आंगी डाण्डिया गैर नृत्य, खाजूवाला बीकानेर के दल ने मश्क वादन, शाहवाद बारां के गोपाल धानुक के दल का सहरिया स्वांग नृत्य तथा शंखवास नागौर के श्रवण कुमार गेगावत के दल का मश्क वादन महत्वपूर्ण रहा। मातीसरा बाड़मेर के तगाराम मेघवाल के दल ने सफेद आंगी गैर नृत्य ग्रामीण वेशभूषा के साथ प्रस्तुत किया। उनके कमरप्टा, साफा, कलंगी, घूंघरू तथा रंग बिरंगे पणचिया ने गैर नृत्य में समां बांध दिया। ढ़ोल की थाप तथा थाली की टंकार के साथ सटियों की टकराहट एक अलग ही लोक में ले गई। सोहनलाल भाट के दल ने कच्ची घोड़ी, तुरई, बांकिया वादन किया। एक साथ दो बाकिंयों के वादन का आश्चर्यजनक कार्य सोहनलाल भाट ने किया। पाबूसर चुरू के श्याम िमत्र मण्डल ने बांसूरी और चंग के साथ परम्परागत लोक नृत्य किया। उसमें बांसुरी की धुन के साथ सांगिकता के साथ बैठना और अदा से खड़े होकर नृत्य करना सबकों लुभा गया। बीकानेर के रोबिले बांके जवानों की प्रस्तुतियों ने राजस्थान की संस्कृति का संगम करवाया।

समापन समारोह में पुष्कर मेले के दौरान विभिन्न वर्गों की प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।विजेता पशुपालकों को पशुपालन विभाग द्वारा नगद पुरस्कार, बीकेटी एवं अशोका मोटर्स के सौजन्य से प्रमाण पत्र व ट्रोफी देकर सम्मानित किया गया। कालू की ढाणी के भरतराज की शंकर हालिस्टन गााय सवेश्र्रष्ठ मेला पशु, शंकर होलिस्टन गाय तथा बच्छड़ी रही। इन्हें ओम भडाना डीएनडी डेयरी के द्वारा शिल्ड प्रदान की गई। पलटन बाजार के लोकेश की शंकर होलिस्टन गाय ने 39 किलो 167 ग्राम दूध 24 घण्टे में देकर सर्वश्रेष्ठ दुधारू पशु का खिताब हासिल किया इन्हें ओम भडाना डेयरी ने 11 हजार रूपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया। समापन समारोह के दौरान आयोजित महिला रस्सा कशी में विदेशी तथा पुरूष रस्सा कशी में देशी टीम ने विजय प्राप्त की। मटका दौड़ में प्रथम स्थान पर नाराज, द्वितीय पर सुरमा देवी तथा तृ तीय स्थान पर सुनिता रही। उत्कृष्ठ कार्य करने वाले 66 व्यक्तियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
   
इस अवसर पर राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष जगमोहन सिंह बघेल, पुष्कर नगर पालिका अध्यक्ष कमल पाठक, उप सभापति मुकेश कुमावत, जिला कलेक्टर गौरव गोयल, प्रो. बी.पी.सारस्वत सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा ने मेला समापन की घोषणा की।



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