कुल्हे का सिरेमिक आॅन सिरेमिक जोड़ प्रत्यारोपण, डाॅ.दीपक जैन ने किया सफल आॅपरेशन - RNews1 Hindi Khabar

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कुल्हे का सिरेमिक आॅन सिरेमिक जोड़ प्रत्यारोपण, डाॅ.दीपक जैन ने किया सफल आॅपरेशन

अजमेर। विदेश से भारत लौटे एक भारतीय नागरिक (रोगी) का मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, पुष्कर रोड अजमेर में वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डाॅ. दीपक जैन ने अत्याधुनिक तकनीक से कूल्हा जोड़ (सिरेमिक आॅन सिरेमिक) बदली कर बड़ी राहत प्रदान की है। चलने-फिरने में असहनीय दर्द से पीड़ित और ठीक से उठने बैठने को भी लाचार अस्थिरोग से पीड़ित रोगी ने आॅपरेशन के दूसरे ही दिन बिस्तर से खड़े होकर चलना शुरू कर दिया । रोगी को अब पूर्णतया आराम है। रोगी को अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
डाॅ. दीपक जैन के अनुसार रोगी के कूल्हे की हड्डी का खून का दौरा रूक जाने से वह विगत छह साल से चलने फिरने में दर्द से पीड़ित था। उन्होंने बताया कि इस रोग को चिकित्सकीय भाषा में एवास्कुलर नेक्रोसिस कहा जाता है। रोगी के दोनों कूल्हों में तकलीफ थी किन्तु बायां कूल्हा खराब हो गया था। उसमें लचक रहती थी, चलने, उठने बैठने में काफी दर्द और तकलीफ महसूस होती थी। रोगी को डायबिटीज व ब्लड प्रेशर की पुरानी बीमारी थी।

डाॅ. दीपक ने बताया कि जांच के बाद रोगी का एक कूल्हा तो दवाइयों से बचा लिया गया जबकि बायें कूल्हे को बदली किया गया। रोगी की युवावस्था को ध्यान में रखते हुए ज्वाइंट के अंदर के दोनों बीयरिंग (कप और हैड) सिरेमिक के लगाए गए जो कि सर्वश्रेष्ठ हैं साथ ही साथ सालों साल चलने वाले हैं। यूंतो बाजार में स्टील और प्लास्टिक के बीयरिंग भी उपलब्ध हैं।

डाॅ. दीपक ने बताया कि इस तरह का रोग सामान्य रूप से उन्हीं लोगों को होता है जिन्होंने स्टेराइड्स दवाइयां सेवन की हों या चोट लगी हो या फिर घूम्रपान एवं शराब का सेवन अधिकतम करते हों। उन्होंने बताया कि जिस रोगी का कूल्हा बदली किया गया उसे यह तकलीफ अकारण ही हुई है। रोगी को किसी तरह की आदत नहीं थी। रोगी अब स्वस्थ्य है और स्वयं चल फिर रहा है। रोगी के आॅपरेशन में मित्तल हाॅस्पिटल के निश्चेतन विशेषज्ञ डाॅ. नेल्सन सहित अन्य स्टाफ का सराहनीय सहयोग रहा।

मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में घुटने, कूल्हे आदि जोड़ प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त आॅपरेशन थियेटर व अत्याधुनिक तकनीक एवं उपकरण उपलब्ध हैं। पूर्व में भी यहां घुटने व कूल्हे के जोड़ बदले जा चुके हैं। डाॅ. दीपक जैन के एवास्कुलर नेक्रोसिस से संबंधित शोधपत्र इंग्लैण्ड के रूमेटोलोजी जरनल में प्रकाशित हो चुके हैं।



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