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पिछड़े लोगों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का सबूत है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम

अजमेर। राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव सुरेश रावत ने कहा कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सरकार की गरीब और पिछड़े लोगों के स्वास्थ्य के प्रति चिंता और संवेदनशीलता का सबूत है। इन योजनाओं के अन्तर्गत प्रदेश के सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों में गंभीर रोगों का निःशुुल्क निदान पाने वाले ही सच्चे मन से बता सकते हैं कि सरकार उनके दुःख और दर्द में हर संभव मदद पहुंचा रही है। लाभार्थी अपने क्षेत्रवासियों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी दें तो समाज के निचले तबके में हर जरुरतमंद तक इस योजना का तेजी से लाभ पहुंच सकता है।

संसदीय सचिव सुरेश रावत गुरुवार सायं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिल की जन्मजात बीमारी का निःशुल्क उपचार पाकर मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से घर लौट रही 5 वर्षीय बालिका साहिबा की कुशलक्षेम पूछने आए थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना वास्तविक जरूरतमंद लोगों के लिए अत्यंत ही लाभकारी साबित हो रही है। रावत ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में इस योजना का प्रदेश के हजारों पीड़ित निःशुल्क लाभ पा रहे हैं । उन्होंने प्रसन्नता दर्शाई कि अकेले मित्तल हाॅस्पिटल में ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब तक 1 हजार 600 से अधिक पिछड़े व वंचित वर्ग के लोग निःशुल्क उपचार करा चुके हैं। रावत ने मित्तल हाॅस्पिटल के चिकित्सकों व प्रबन्धन को इसके लिए बधाई दी।

उल्लेखनीय है कि बेबी साहिबा संसदीय सचिव सुरेश रावत के पुष्कर विधानसभा क्षेत्र स्थित ऊंटड़ा ग्राम की रहने वाली है। उसके पिता रोजादीन किशनगढ़ मार्बल मंडी में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। बेबी साहिबा के दिल में जन्मजात छेद था। दिल की इस तकलीफ के कारण उसकी शारीरिक वृद्धि रुक रही थी। बच्ची को बुखार बना रहता था और वह आम बच्चों के साथ खेल भी नहीं पाती थी। थोड़ा बहुत ही दौड़-भाग करने पर बच्ची की सांसे फूल जाती थीं। ऊंटड़ा आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई के लिए जाते हुए उसकी जन्मजात बीमारी की पहचान हुई। जहां से उसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिंहित कर उपचार के लिए मित्तल हाॅस्पिटल रेफर किया गया।

मित्तल हाॅस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. राहुल गुप्ता ने बताया कि सामान्य रूप से दिल के छेद की बीमारी का उपचार हृदय की जटिल सर्जरी के द्वारा ही होता है। साहिबा चूंकी बच्ची है इसलिए इसके मामले में विशेष सतर्कता रखते हुए बिना किसी चीर फाड़ के अन्यन्त ही आधुनिक तकनीक से सफल इलाज किया गया। साहिबा के शरीर पर किसी तरह के चीरे के निशान आदि ना रहे इसलिए बच्ची के पैर की नस के जरिए उसके दिल तक पहुंच कर छतरी लगाई गई जिससे उसके दिल का छेद बंद हो गया।

उन्होंने बताया कि आरबीएसके योजना के तहत अजमेर में इसतरह से पहला ही आॅपरेशन किया गया है। डाॅ. राहुल ने बताया कि साहिबा को जो तकलीफ थी ऐसा हजारों बच्चों में दो-चार को जन्मजात ही होती है। उन्होंने कहा कि बच्ची अब पूर्णरूप से स्वस्थ है। वह अब सामान्य बच्चों की तरह अपना आगे का जीवन जी सकेगी।
बच्ची के पिता रोजादीन ने राज्य सरकार और मित्तल हाॅस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. राहुल गुप्ता व स्टाफ की सेवाओं के प्रति धन्यवाद दिया। रोजादीन ने कहा कि आर्थिक कमजोरी के रहते वह अपनी बेटी के उपचार के लिए सोच भी नहीं सकता था। उसने बताया कि वह जब दो साल की थी तब से ही उसकी तकलीफ का पता चला था। आॅपरेशन पर होने वाले एक-सवा लाख का खर्च उठा नहीं पाने के कारण सरकारी अस्पताल से  दवाइयां लेकर ही काम चलाते रहे। एक दिन आंगनबाड़ी केंद्र पर ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी के आने पर उन्होंने बच्ची को जांच के लिए भेजा।

इस अवसर पर मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक सुनिल मित्तल, डाॅ. दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल, सीईओ एस के जैन, वाइस प्रेसीडेंट श्याम सोमानी, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ .सूर्या, डाॅ. राहुल गुप्ता, डाॅ. विवेक माथुर, डाॅ. विपिन सिसोदिया, डाॅ. राहुल चौहान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।



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