ट्राई के साथ ईको-सेल्फी के जरिए कीजिए प्रकृति के प्रति प्रेम का इजहार - RNews1 Hindi Khabar

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ट्राई के साथ ईको-सेल्फी के जरिए कीजिए प्रकृति के प्रति प्रेम का इजहार

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जयपुर। वेलेंटाइंस डे भले ही चला गया हो, लेकिन वातावरण में प्रेम अभी भी मौजूद है। बसंत का मौसम हम सभी के लिए प्रेम को व्यक्त करने का सही मौसम होता है। यह मौसम बहुत ही सुहावना होता है, इसमें फूल खिलते हैं और चारों ओर प्राकृतिक खुबसुरती रहती है, मन करता कि हमेशा ऐसा ही मौसम रहे तो अच्छा रहे। ऐसा हो तो नही सकता, लेकिन आपके पास मौका है जिसमें आप सेल्फी, फोटो व ग्रुपफोटो के जरिए मौसम के खूबसूरत पलों को हमेशा बरकरार बनाए रखें और इस माध्यम से आप प्रकृति के प्रति अपने ‘लव व केयर‘ का इजहार कर सकते हैं।

ट्राई (द रेस्पाॅन्सिबल यू) द्वारा ईको-सेल्फी काॅन्टेस्ट आयोजित करके रोमांचक पुरस्कारों के साथ रेस्पॉन्सिबल लाइफस्टाइल के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने की सामाजिक पहल की गई है। वैलेंटाइन्स डे पर शुरू हुआ यह ईको-सेल्फी काॅन्टेस्ट 31 मार्च 2017 तक जारी रहेगा। इस प्रतियोगिता के साथ ट्राई विशेष रूप से उन युवाओं के साथ जुड़ना चाहता है, जो लाइफस्टाइल के विकल्प बनाने के परिवर्तनकारी बिंदु पर हैं। बेहतर अर्थव्यवस्था एवं बढ़ते उपभोक्तावाद (पश्चिमी संस्कृति) के साथ, युवा काफी विकल्पों से अत्यंत आकर्षित हैं, जिसमें उन्हें उनके कंजम्प्शन व डिस्पोजल पर आधारित ईको-सिस्टम पर छोड़ दिए जाने वाले प्रभाव की जागरुकता नहीं है। 

ट्राई विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियानों के माध्यम से सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के बारे में जागरूकता उत्पन्न कर रहा है। TryForGood.com/eco-selfie पर ये सेल्फी व फोटो भेजे जा सकते हैं। 

ट्राई (द रेस्पाॅन्सिबल यू) इस विश्वास के साथ शुरू की गई पहल है कि एक स्वस्थ वातावरण एवं शांतिपूर्ण समुदाय में रहने से ही खुशियों की शुरूआत होती है, लेकिन असहाय होकर हम ऐसे वातावरण में रह रहे हैं, जहां जनसंख्या, प्रदूषण व अशांति दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। हम इसे बदल तो नहीं सकते हैं, लेकिन हम एक जागरुक व जिम्मेदार नागरिक बनकर इन प्रभावों को कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

ट्राई की प्रिंसिपल अंजू एक कम्यूनिकेषन स्ट्रेटेजिस्ट व क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। इन्होंने बायोटेक्नोलाॅजी में पीएचडी कर रखी है। ये अपनी द्विआयामी फिलाॅस्फी बताते हुए कहती हैं, सस्टेनेबिलिटी के बारे में व्यापक जागरूकता लाने के लिए आम तौर पर अलग-अलग रहने वाले विज्ञान और कला समुदायों द्वारा एक साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं। वहीं खुषी सस्टेनेबिलिटी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है यदि लोग खुश नहीं हैं, तो वे अपने समुदाय व पर्यावरण की अधिक देखभाल नहीं कर पाएंगे।



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