साइबर क्राइम के मामलों में राजस्थान 5वें और अजमेर तीसरे स्थान पर - RNews1 Hindi Khabar

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साइबर क्राइम के मामलों में राजस्थान 5वें और अजमेर तीसरे स्थान पर

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अजमेर। साइबर क्राइम के क्षेत्र में भारत में राजस्थान का पांचवां स्थान है, जबकि राजस्थान में अजमेर का तीसरा स्थान है। तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम के ग्राफ को रोकने के लिए लोगों में इसके प्रति जारूकता लाना बेहद जरूरी है। समाज की इस जरूरत को देखते हुए राष्ट्रिय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार का यह प्रयास काफी सराहनीय है कि वो जिला स्तर पर साइबर क्राइम की जारूकता कार्यशालाओं का आयोजन करा रहे हैं।

उक्त विचार अजमेर के पुलिस अधीक्षक डॉ. नितिनदीप ब्लग्गन ने साइबर क्राइम अवेयरनेस पर स्थानीय राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय में चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन सत्र में व्यक्त किए। लगभग 30 मिनिट के अपने संबोधन में डॉ. ब्लग्गन ने साइबर क्राइम एवं इसकी भयावहता पर प्रकाश डाला। उन्होने स्वंय उनके साथ भी एकबार हो चुके ऑनलाइन शॉपिंग में फ्रॉड के वाकये को प्रतिभागियों के साथ साझा करते हुए कहा कि किस प्रकार कदम कदम पर हम सबको जागरूक रहने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग, भारत सरकार की ओर से आयोजित इस कार्याशाला में पहले दिन उदघाटन के बाद दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र में जयपुर से आए साइबर क्राइम विशेषज्ञ मुकेष चौधरी ने कई केस स्टडीज पर चर्चा करते हुए प्रतिभागियों को प्रायोगिक रूप से साइबर क्राइम की बारीकियां समझाई। 2 घण्टे के अपने सत्र में उन्होने बताया कि व्यक्तिगत साइबर क्राइम एवं पब्लिक साइबर क्राइम में क्या अंतर है और इन्हें किस प्रकार इनवेस्टीगेट किया जाता है।

पब्लिक के साथ होने वाले वाले साइबर क्राइम कई बार बहुत घातक सिद्ध हो सकते हैं इनमें बड़ी संख्या में जान माल का भी नुकसान हो सकता है। इस प्रकार के केसों में सैक्षन 66 एफ के तहत कार्यवाही करते हुए दण्ड का प्रावधान होता है। एक अन्य तकनीकी सत्र में सरदार पटेल पुलिस विष्वविद्यालय, जोधपुर के सहायक प्रोफेसर विकास सिहाग ने इंटरनेट की दुनिया की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि आम आदमी इंटरनेट की दुनिया का सिर्फ 3 प्रतिशत हिस्सा ही देख सकता है जबकि 97 प्रतिशत हिस्सा उसकी पहुंच से दूर ही रहता है। उन्होने कहा कि हम सबको कोई भी एप डाउनलोड करते समय ध्यान रखना चाहिए की वो कोनसी परमिशन हमसे मांग रहे हैं। अनावश्यक परमिशन को हमें रिवोक कर लेना चाहिए अन्यथा कम्पनी अपने मोबाइल डाटा का दुरूपयोग कर सकती है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहित मिश्रा ने बताया कि जयपुर के एम.के.बी. स्कूल तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण सोसायटी एवं हमारे महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यषाला का आयोजन किया जा रहा है। यहां विभिन्न तकनीकी सत्रों में कई विषय विशेषज्ञ विस्तार से इस विषय पर जानकारी देंगे। वर्कशॉप में इस महाविद्यालय के अतिरिक्त दूसरे महाविद्यालयों के विद्यार्थी एवं शिक्षक एवं अन्य लोग भी भाग ले रहे हैं। विज्ञान संचारक तरूण कुमार जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा एवं इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अन्त में सहायक प्रोफेसर ज्योति गजरानी ने आभार व्यक्त किया।



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