बाहुबली की तमाम कड़ियों को जोड़ने में बखूबी कामयाब 'द बिगेनिंग' और 'द कन्क्लूजन' - RNews1 Hindi Khabar

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बाहुबली की तमाम कड़ियों को जोड़ने में बखूबी कामयाब 'द बिगेनिंग' और 'द कन्क्लूजन'

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आलेख : पवन टेलर
साल 2015 में आई सुपरहिट फिल्म 'बाहुबली — द बिगेनिंग' के आखिर में एक सवाल दर्शकों के जहन में घर गया था और पिछले दो सालों से इस सवाल का जवाब लोग ढूंढ रहे थे। सवाल था आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? इस सवाल का जवाब लोगों को उस वक्त मिल गया, जब 'बाहुबली — द बिगेनिंग' के अगले पार्ट 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' को 28 अप्रैल के दिन रिलीज कर दिया गया। सिल्वर स्क्रीन पर आई 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' में दर्शकों को जहां अपने सवाल का जवाब मिल गया, वहीं फिल्म के निर्माता निर्देशक फिल्म के पात्र अमरेन्द्र बाहुबली और महेन्द्र बाहुबली की कई कड़ियों को जोड़ने में बखूबी कामयाब भी हुए हैं।

फिल्म 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां 'बाहुबली — द बिगेनिंग' को खत्म किया गया था। यहां एक बात सबसे खास है और वो ये है कि फिल्म के निर्माता—निर्देशक ये पहले ही तय कर चुके थे कि बाहुबली को पूरी कहानी को दो हिस्सों में दिखाया जाएगा। इसके चलते ही 'बाहुबली — द बिगेनिंग' के आखिर में 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' 2016 लिखा हुआ दिखाया गया था। हालांकि ऐसा हो नहीं पाया और किन्हीं कारणों से फिल्म को 2016 के बजाय 28 अप्रैल 2017 के दिन रिलीज किया गया।

खैर, अब बात करते हैं फिल्म की कहानी के बारे में, 'बाहुबली — द बिगेनिंग' में जब शिवा यानि महेन्द्र बाहुबली ने कटप्पा से ये सवाल किया कि आखिर वो है कौन। इस पर कटप्पा ​शिवा को उसके पिता यानि अमरेन्द्र बाहुबली की कहानी सुनाता है। अमरेन्द्र बाहुबली की कहानी सुनने के बाद जब उनसे मिलने के बारे में सवाल किया जाता है तो कटप्पा बताता है कि वो अब जिन्दा नहीं है, उन्हें मार दिया गया है। इस पर शिवा कटप्पा से पूछता है कि उन्हें किसने मारा। जवाब में कटप्पा बताता है कि 'मैंने ही मारा था उन्हें'। यहीं पर फिल्म 'बाहुबली — द बिगेनिंग' को खत्म कर दिया जाता है। कटप्पा द्वारा ​शिवा को सुनाई गई उसके पिता की कहानी के अगले हिस्से से 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' की शुरूआत होती है। यानि 'बाहुबली — द बिगेनिंग' में काल्कैया को मारने के बाद राजमाता शिवगामी बाहुबली को राजा और भल्लालदेव को सेनापति बनाए जाने की घोषणा करती है। इसके ठीक बाद की कहानी कटप्पा की जुबानी के रूप में फिल्म 'बाहुबली 2 — द कन्क्लूजन' की शुरूआत में दिखाई गई है।

कहानी में दिखाया गया है कि किस तरह से अमरेन्द्र बाहुबली की देवसेना से मुलाकात होती है और किस तरह से उसे बंधी बना लिया जाता है। वहीं भल्लालदेव के षडयंत्र का शिकार होकर राजमाता शिवगामी बाहुबली को मारने के लिए कटप्पा को आदेश देती है। कटप्पा जब ऐसा करने से इन्कार करता है तो शिवगामी खुद ही बाहुबली को मारने की बात कहती है। इस कटप्पा एक मां के हाथों अपने बेटे का खून होने के बजाय खुद ही बाहुबली को मारने के लिए मजबूरन राजी हो जाता है। अपने पुरखों द्वारा राजपरिवार को दिए गए वचन के कारण कटप्पा बाहुबली को मार देता है। लेकिन जब कटप्पा को भल्लालदेव और बिज्जालादेव के षडयंत्र के बारे में बारे चलता है तो वह शिवगामी को जाकर बता देता है। दूसरी ओर बाहुबली और देवसेना अपने बेटे को लेकर वहां आ जाती है, जिसे  शिवगामी बचाने की कोशिश में वहां से भाग जाती है, लेकिन पीछे से उसका बेटा भल्लालदेव उसे तीर का निशाना बना देता है और वह नदी में गिर जाती है।

आपको याद होगा कि 'बाहुबली — द बिगेनिंग' की शुरूआत भी ठीक यहीं से हुई थी, जिसमें शिवगामी अपने पौते यानि महेन्द्र बाहुबली को गोद में लेकर भागने का प्रयास करती हुई नजर आई थीं, जिसकी पीठ में तीर लगा हुआ होता है। तभी अचानक वहां भल्लालदेव के दो सैनिक आ जाते हैं, जिन्हें शिवगामी मार देती है। इसके बाद शिवगामी बाढ़ में डूब जाने के बावजूद अपने पौते को अपने हाथ पर टिकाये हुई रखती है। ऐसे में अमरेन्द्र बाहुबली और महेेन्द्र बाहुबली की कई कड़ियों को आपस में जोड़ने में 'द बिगेनिंग' और 'द कन्कलूजन' बखूबी कामयाब हुई है। इसके साथ ही बाहुबली के दोनों भागों में एक बात सबसे खास ये रही कि कटप्पा इस पूरी कहानी का सबसे मुख्य किरदार बनकर उभरा, जिसने अपने पुरखों द्वारा दिए गए राजपरिवार की सेवा करने के वचन को कभी भी किसी भी सूरत में टूटने नहीं दिया। वहीं राजमाता शिवगामी भी हर सूरत में राज्यधर्म का पालन करने का संदेश आज ही राजनीति को देने में बखूबी कामयाब हुई है।

बहरहाल, फिल्म देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि फिल्म का पूरा मजा तो आप सिनेमाघर में जाकर ही ले पाएंगे, और ये आपका ये मजा उस वक्त और बढ़ जाएगा, जब सिनेमाघर में आपका परिवार भी आपके साथ मौजूद होगा। क्योंकि फिल्म में आपको हर तरह का रसास्वादन करने के भरपूर अवसर दिए गए हैं। साथ ही उनमें कटप्पा की दिल लुभा लेने वाली कॉमेड़ी का तड़का भी लगाया गया हैं। इसके साथ ही बाहुबली फिल्म इस बात को भी सार्थक करने में बखूबी कामयाब हुई है कि किसी भी फिल्म को हिट या सुपरहिट बनाने के लिए सिर्फ फूहड़ अथवा हॉट सीन होना भर काफी नहीं होता। या फिर बिना फूहड़ता परौसे अथवा बिना किसी हॉट सीन के भी किसी कलात्मक फिल्म के लिए न सिर्फ 100—200 या 500—1000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लेने से कोई नहीं रोक सकता, बल्कि ऐसी फिल्में भी एक नया इतिहास बनाने में कामयाब हो सकती है।




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