हरी शेवा उदासीन आश्रम में वार्षिकोत्सव संपन्न - RNews1 Hindi Khabar

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हरी शेवा उदासीन आश्रम में वार्षिकोत्सव संपन्न

भीलवाड़ा। आराध्य गुरूओ का चार दिवसीय वार्षिकोत्सव की कड़ी में मंगलवार को आश्रम में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने गुरूदर पर उपस्थित होकर मत्था टेका। हरी शेवा प्रांगण में संतो-महात्माओं के आने का क्रम जारी रहा, जिसमें श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत दुर्गादास, अखाड़ा संगलवाला अमृतसर के महंत दिव्याम्बर मुनि जी भी शामिल हुए। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं ने धूणा साहब, आसण साहब, समाधि साहब, हरिसिद्धेश्वर मंदिर एवं समाधियों पर पूजा अर्चन व ध्यान किया। नितनेम पश्चात् संतो-महात्माओं ने भजन प्रवचन की श्रंखला में महंत स्वरूपदास अजमेर ने भजन ’’आहिं महरबान सांई मिलयो डस आहे’’ महंत हनुमानराम पुष्करराज ने भजन ’’हरदम तोखे याद कयूं था सजण सुबह ऐं शाम हली आ संत सचा शेवाराम’’ महंत दर्शनदास गांधीधाम ने ’’दर्शन दिजै खोल के द्वार’’  स्वामी ईसरदास ने ’’तेरे दर को छोड़ के किस दर जाऊं’’, महंत श्यामदास किशनगढ़ ने ’’आशीष कर आशीष कर’’, महंत गणेशदास भीलवाड़ा ने ’’जो मांगे ठाकुर अपने ते सोई सोई देवे’’ महंत अमरलाल राजकोट ने ’’हे गोविन्द हे गोपाल हे दीनदयाल नाथ’’ सहित स्वामी मोहनदास व चंदन इन्दौर व अन्य ने भजन प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर अजमेर के भाई फतनदास, स्वामी अर्जुनदास, उज्जैन के संत अमोलक दास, भोपाल के स्वामी मोहनदास, महंत जमनापुरी सहित उदासीन निर्वाण मण्डल के संत महात्मा एवं गुणीजन उपस्थित थे। स्वामी माधवदास इन्दौर भागवत व्याख्याकार ने इला, पिंगला, सुषुम्ना नाड़ीयो की आध्यात्मिक त्रिवेणी की व्याख्या की तथा भगवान श्रीचन्द्र जी की मात्रा वाणी का वर्णन किया।

महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन संत मयाराम, संत राजाराम व बालक मंडली ने भजन ’’भूले मार्ग जिन्हें बताया ऐसा गुरू वडभागी पाया’’ प्रस्तुत करते हुए अपने गुरूओं का गुणगान किया एवं उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने का आव्हान किया। अपने प्रवचनो में उन्होंने तुलसीदास जी का दोहा ’’संत मिले, सत्संग मिले, मंगता और मेहमान, तुलसी भाग्य उदय की चार निशानी जान’’ बताते हुए कहा कि भक्तों का कोई पुण्य कार्य ही होता है जो संत दर्शन मिलता है। संत-महापुरूष साध संगत को दर्शन देकर कृतार्थ करते है। संतो-महापुरूषो के दर्शन से भाग्य प्रबल होता है। साथ ही उन्होंने समाज में सत्प्रवत्तियों को बढ़ावा देकर सनातन संस्कृति की रक्षा करने का भी आव्हान किया।

इससे पूर्व द्वितीय दिन प्रारंभ हुए श्री श्रीचन्द्र सिद्धान्त सागर ग्रन्थ का अखण्ड पाठ पूर्ण होकर रोट प्रसाद का भोग लगाया गया। आरती प्रार्थना होकर संतो महात्माओं का एवं आम भण्डारा हुआ।

सांयकाल में नितनेम, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। संतो महात्माओं के प्रवचन सत्संग हुए। श्रद्धालुओं ने गुरूओं की समाधि पर मनोकामना पूर्ण होने पर चादरे चढ़ाई एवं प्रार्थना की। आरती अरदास पश्चात् बाहर से आई हुई भगत मण्डलियों ने भजन प्रस्तुत किये तथा संतो महात्माओं के सानिध्य में पल्लव की रात का विशेष कार्यक्रम हुआ। महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने वार्षिकोत्सव के सुखद सम्पन्न होने पर सद्गुरूओं को धन्यवाद दिया एवं प्रशासन-पुलिस की भी सराहना की। समाज, राष्ट्र तथा धर्म की रक्षा व खुशहाली की मंगलकामना के साथ उत्सव सानंद सम्पन्न हुआ।



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