Video : 38 साल इंजतार के बाद भारतीय सेना को मिली अमेरिका से एम-777 हाॅवित्जर तोपों की पहली खेप - RNews1 Hindi Khabar

Header Ads

Video : 38 साल इंजतार के बाद भारतीय सेना को मिली अमेरिका से एम-777 हाॅवित्जर तोपों की पहली खेप

Pokhran, Jaisalmer, Rajasthan, Indian Army, America, M-777 Howitzers, M-777 Howitzers in Jaisalmer
जैसलमेर। जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की मारक क्षमता को मजबूत करने व आधुनिकीकरण की कड़ी में हाल ही में अमेरिका के साथ एम-777 अलट्रा लाईट हॉवित्जर गन खरीदने के एमओयू हुए। इसी क्रम में प्रारंभ में दो अमेरिकन गन ट्राईल प्रशिक्षण के लिए जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में पहुंच गई है। आखिरकार 38 साल के लंबे इंजतार के बाद भारतीय सेना को अमेकरेा से एम-777 हाॅवित्जर तोपो की पहली खेप मिल चुकी है। 

इस तरह साल 1986 में बोफोर्स तोप के बाद अब सेना को कारगर तोप मिलने का रास्ता साफ हो गया। इसके ट्रायल प्रशिक्षण में अमेरिकन सदस्यों की टीम तथा इसके निर्माता बीएई सिस्टम के इंजीनियर इस अवसर पर उपस्थित थे। स्वीडस बोफोर्स तोपों के बाद भारतीय सेना में सम्मिलित होने के लम्बे अंतराल के बाद ये अमेरिकन शक्तिशाली गन भारतीय सेना की प्रहार क्षमता निश्चित रुप से मजबूत करेगी।

ट्रायल प्रशिक्षण के लिए भारतीय सेना की एक आर्टलरी यूनिट का एक दल एक लेफ्टिनेंट कर्नल सौरभ के नेतृत्व में 4.4 टन वजनी इस गन की डेवेलपमेन्ट ऑफ़ फायरिंग टेबल का काम मंगलवार से शुरू कर दिया गया। मंगलवार को इस गन द्वारा नाईट में फायर किया गया तथा इस कड़ी में बुधवार को इनडायरेक्ट ऑफ़ फायर किया गया।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका के साथ 155 एम 777 अल्ट्रा होविज्तर लाईट गन खरीदने के एमओयू होने के बाद अब इसके व्यापाक परिषण की तैयारियां शुरु की जा चुकी थी। इसके लिए गन टेबल बनाने व अलग-अलग एम्न्यूशन ट्रायल किये गए। इसके अलावा अलग-अलग ऐंगल व अलग-अलग दूरियों पर इसे फायर कर इसकी मारक क्षमता को परखा गया।


गन की डील के अन्तर्गत कुल 145 गन की डिलीवरी 2021 तक होनी है। इसमें 25 गन अमेरिका से इम्पोर्ट की जायेगी, जबकि बाकी 120 गनों को भारत में ही बीएई सिस्टम के तहत बिजनस पार्टनर महेन्द्रा कंपनी के सहयोग से असेम्बल कर डिलीवरी की जायेगी।

एम-777 अलट्रा लाईट हॉवित्जर की खूबियां :
  • इस गन की खासियत है कि ये 4.4 टन वजनी होने के कारण इसे उठाकर या फील्ड कर हेलिकोप्टर के जरिये या अन्य किसी साधनों से एक स्थान से दूसरे स्थानों पर आसानी से ले जाया जा सकता  है। 
  • इसमें भारत निर्मित गोला बारूद का प्रयोग किया जा सकता है।
  • इस गन की डायरेक्ट मारक क्षमता 04 किलोमीटर तथा इनडायरेक्ट मारक क्षमता 30 से 40  किलोमीटर तक है।
  • इस गन को भारत के किसी भी मौसम व परिस्थितयों और पहाड़, पत्थर, रेगिस्तान, मैदानी इलाकों तथा जलीय क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है।




Get all updates by Like us on Facebook and Follow on Twitter

Powered by Blogger.