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क्या आपको पता है कि आखिर क्यों नहीं लगाया गया शराब और पेट्रोल-डीजल पर GST

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1 जुलाई से लागू हुए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) से केंद्र सरकार ने पांच चीजों को बाहर रखा है, जिसमें सभी प्रकार की शराब, पेट्रोल—डीजल, हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐविएशन फ्यूल, रियल एस्टेट और बिजली शामिल है। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे क्या कारण है, जिनके कारण इन पांचों चीजों को GST से बाहर रखा गया। इस सवाल को लेकर कई लोगों के जहन में आ रहा है कि शायद इन पांचों चीजों को GST के दायरे में लेने से इन दामों में कटौती हो सकती थी। वहीं दूसरी ओर, इन चीजों को GST के दायरे में लेने के बाद इनके दामों में कटौती हो जाने से सरकार के राजस्व में भी गिरावट आ जाती, लिहाजा इसी वजह से इन चीजों को GST के दायरे से बाहर रखा गया है।

गौरतलब है कि 30 जून और 1 जुलाई की मध्य रात्रि से देशभर मे लागू हो चुके जीएसटी की लॉन्चिंग के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी को एक नया नाम देते हुए जीएसटी को गुड्स एवं सिम्पल टैक्स की संज्ञा दी थी। वहीं इन पांचों चीजों — शराब, पेट्रोल-डीजल, हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐविएशन फ्यूल, रियल एस्टेट और बिजली — को जीएसटी के दायरे से बाहर रखे जाने की वजह से लोगों में खासी नाराजगी भी है। लोगों का मानना है कि सरकार महज अपना और पूंजीपतियों का ख्याल रख रही है और आमजन एवं गरीब की उसे कोई फिक्र नहीं है।

दरअसल, विशेषज्ञों के अनुसार इन पांचों चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की सबसे बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि केंद्र और राज्य सरकार को सबसे ज्यादा कमाई इन्हीं चीजों से होती है। पेट्रोल-डीजल पर अभी वैट और अन्य टैक्स मिलाकर करीब 57 फीसदी टैक्स लगता है। वहीं अगर पेट्रोल-डीजल पर भी जीएसटी लगाया जाता और इनको अगर 28 फीसदी के स्लैब में भी रखा जाता तो केंद्र एवं राज्य सरकार की कमाई पर इसका खासा असर होता। इसलिए इन पांचों चीजों कों जीएसटी के दायरे से फिलहाल बाहर रखा गया है। हालांकि ये अलग बात है कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि आगे आने वाले समय में पेट्रोल एवं डीजल को भी जीएसटी में शामिल किया जाएगा। लेकिन ये तब की बात है, जब केंद्र और राज्य सरकारों की कमाई सही तरीके से होने लगेगी और अपनी कमाई के लिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
कितनी सार्थक है 'एक राष्ट्र एक कर' की बात :
जीएसटी को लागू किए जाने के पीछे जो बात मुख्य रूप से कही जा रही थी, वो ये है कि जीएसटी के बाद 'एक राष्ट्र एक कर' होगा। करीब एक हजार से ज्यादा चीजों पर जीएसटी दरें तय कर दी गई हैं। जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब बनाए गए हैं, जिनमें 5%, 12%, 18% और 28% हैं। इनमें से भी अधिकतर वस्तुओं को 12% और 18% टैक्स के दायरे में रखा गया है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक जीएसटी के विषय में कही जाने वाली 'एक राष्ट्र एक कर' की बात तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। क्योंकि पेट्रोलियम, रियल एस्टेट, शराब और बिजली को जीएसटी के दायरे में नहीं रखा गया है।

ऐसा होने के कारण से अभी भी अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल या डीजल की कीमतें अलग-अलग ही होगी। इसी तरह से बिजली की दरें भी हर राज्य में अलग-अलग होंगी। दरअसल, ये सब राज्यों की असहमति के कारण हुआ है। राज्य इस पर सहमत इसलिए नहीं थे, क्योंकि इन चार वस्तुओं से उन्हें भारी राजस्व मिलता है। उन्होंने कहा कि राज्य नहीं चाहते थे कि इतने बड़े राजस्व को वो अपने हाथ से जाने दें। ऐसे में केंद्र सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था और इसके चलते ही इन चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया।




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