40 प्रतिशत से कम निःशक्तता वाले दिव्यांग भी करवाएं पंजीयन : जिला कलेक्टर - RNews1 Hindi Khabar

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40 प्रतिशत से कम निःशक्तता वाले दिव्यांग भी करवाएं पंजीयन : जिला कलेक्टर

अजमेर। पं. दीनदयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन शिविरों के अन्तर्गत 40 प्रतिशत से कम निःशक्तता वाले दिव्यांगों द्वारा भी पंजीयन करवाया जाना आवश्यक है। जिला कलक्टर ने आह्वान किया कि समस्त जिलेवासी अपने आसपास के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कम अथवा अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों का पंजीयन करवाने में सहयोग प्रदान करें।

जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने बताया कि सरकार द्वारा पं.दीनदयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन शिविरों में जिले के समस्त दिव्यांगों को पंजीकरण करके उन्हें लाभान्वित किया जाएगा। ऐसे दिव्यांग जिनका प्रमाण पत्र 40 प्रतिशत अथवा इससे कम का बना हुआ है। उनका भी पंजीयन किया जाएगा। साथ ही विशेष योग्यजन होने की संभावना वाले निःशक्तजनों का भी पंजीयन करवना आवश्यक है। निःशक्तता प्रमाण पत्र नही बने हुए दिव्यांग भी शिविर में अपना पंजीयन करवा सकते है।

उन्होंने बताया कि 5 प्रतिशत के दिव्यांग भी अपना पंजीयन करवा सकते हैै। अभियान के द्वितीय चरण में निःशक्तता प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। पंजीयन से पूरे देश के दिव्यांगों का डाटाबेस तैयार हो जाएगा। दिव्यांगों को प्रमाण पत्र एवं यूनिक आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे। यह कार्ड केन्द्र एवं राज्य सरकार की समस्त योजनाओं का लाभ दिव्यांग को दिलाने के लिए उपयोगी होगा। दिव्यांग के द्वारा विभिन्न लाभ प्राप्त करने के लिए अलग-अलग कार्यालयों में नही जाना पड़ेगा। यूनिक आई डी के माध्यम से उसे प्राप्त होने वाले लाभ पात्रता होने पर सीधे ही प्राप्त हो जांएगे।

उन्होंने बताया कि समस्त ई-मित्र केन्द्रों का पंजीयन के लिए पाबंद किया गया है। ई-मित्र केन्द्र द्वारा सहयोग नहीं करने पर इनकी शिकायत स्थानीय विकास अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी अथवा जिला प्रशासन से की जा सकती है। इसके आधार पर ई-मित्र केन्द्र संचालक के विरूद्ध कार्यवाही अमल में लायी जाएगी। दिव्यांग भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड तथा जाति एवं आय के स्व घोषणा पत्र के द्वारा ई-मित्र केन्द्र अथवा शिविर स्थल पर पंजीयन करवा सकते है। आधार एवं भामाशाह कार्ड नहीं होने की स्थिति में चिन्हिकरण के उपरान्त सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा बनाया जाएगा। जिले में जनगणना आधारित आंकड़ों के अनुसार लगभग 58 हजार दिव्यांग होने का अनुमान है।

शिविरों में इन समस्त दिव्यांगों को पंजीकृत करने का कार्य किया जाएगा। अरांई में 2 हजार 400, भिनाय में 2 हजार 900, जवाजा में 4 हजार 300, केकड़ी में 3 हजार 600, किशनगढ़ में 4 हजार, मसूदा में 4 हजार 300, पीसांगन में 6 हजार, सरवाड़ में 2 हजार 300, श्रीनगर में 5 हजार 100 दिव्यांगों का अनुमान ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया गया है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में भी अजमेर में 12 हजार, ब्यावर में 3 हजार 400, केकड़ी में 900, किशनगढ़ में 3 हजार 400, नसीराबाद में एक हजार 100, सरवाड़ में 500, पुष्कर में 450, विजयनगर-मसूदा में 700 दिव्यांग अनुमानित है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान में 21 प्रकार की निःशक्तता को दिव्यांगता की श्रेणी में माना गया है। इनमें दृष्टि बाधित-रंग की पहचान में दिक्कत, अल्प दृष्टि- कम दिखे आसपास चलने फीरने में परेशानी, कुष्ठ रोग से अंगुलियों मे टेड़ापन, धब्बे, सुन्न अंग, विकृतता, सुनने में कठिनाई-70 डेसीबल तक नहीं सुनना, हाथ पैर में निःशक्तता- लकवा या पोलियोेें अथवा दुर्घटना, कद 147 सेमी से कम होना, असामान्य अंग, हमउम्र बच्चों के समान कार्य नहीं करना, मानसिक विमंदित, आंखे मिलाकर बात नहीं करना, अंग हिलाते रहना, सेरिब्रल पाल्सी-अंगों में जकड़न, विकृति, खुला मुंह, लार गिरना, मांसपेशियों में विकृति, पंजों के बल चलना, दौड़ने कूदने में परेशानी, दिमाग और स्पाइनकोड में असंतुलन, सीखने समझने की कमजोरी, कमजोर भाषा ज्ञान, ब्रेन डेमेज, स्पष्ट नहीं बोलना, तुतलाना, शब्दो में निरंतरता की कमी, हिमोग्लोबिन की विकृति, खून की कमी, हिमोफीलिया-घाव से खून गिरना बंद नहीं होना, सिकिल सेल बीमारी से खून की अत्यधिक कमी, अंग खराब होना, बहुविकलांगता, मूक, श्रवण, दृष्टि बाधित, तेजाब हमला पीड़ित, पार्किंसन से कमर झुकना, हाथों में कम्पन्न तथा कदमों में संतुलन नहीं रहना जैसे लक्षणों मे से कोई एक होना प्रमुख है।



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