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केरल हाईकोर्ट ने रद्द किया एस श्रीसंत पर BCCI द्वारा लगाया गया आजीवन प्रतिबंध

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तिरुवनन्तपुरम। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज खिलाड़ी एस श्रीसंत को आज केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जिसके अनुसार उन पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को रद्द कर दिया गया है। गौरतलब है कि साल 2013 में आईपीएल के 6वें सीजन के दौरान श्रीसंत पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा था। इसके बाद बीसीसीआई ने उन्हें स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी मानते हुए उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।

इस मामले में श्रीसंत को दिल्ली के कोर्ट से पिछले वर्ष ही क्लीन चिट मिल चुकी है। हालांकि इसके बावजूद उन्हें बीसीसीआई से राहत नहीं मिली थी और उन पर आजीवन प्रतिबंध जारी रखा गया था। इसके बाद इस तेज गेंदबाज ने केरल हाई कोर्ट का रुख करते हुए यह दलील दी कि दिल्ली कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद भी बीसीसीआई द्वारा प्रतिबंध लगाने के निर्णय से उनका करियर बर्बाद हो रहा है। इस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए बोर्ड का निर्णय रद्द कर दिया।

श्रीसंत ने कहा था, 'जब मेरे आजावीन प्रतिबंध के बारे में कोई आधिकारिक लेटर नहीं है, तो क्यों अंपायर मुझे खेलने से रोकेंगे? जब मैं तिहाड़ जेल में था, तो मुझे सिर्फ एक सस्पेंशन लेटर मिला था। सस्पेंशन लेटर सिर्फ 90 दिनों के लिए वैध होता है। आज तक बैन को लेकर कोई आधिकारिक संवाद नहीं हुआ है।'

श्रीसंत का कहना था कि, 'ये मेरी बेवकूफी थी जो मैं इतने दिनों तक क्रिकेट नहीं खेला। मेरे साथ आंतकवादी से भी ज्यादा खराब व्यवहार किया गया।' इस पर केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया था। बीसीसीआई उप पर बैन कैसे थोप सकता है? यह न्यायिक चरित्र को मानने से इंकार करना है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस ने 2013 में आईपीएल-6 के दौरान सट्‌टेबाजी का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान रॉयल्स के तीन क्रिकेटरों - एस. श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण को अरेस्ट किया था, लेकिन शुरू से ही वह पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तो दिल्ली पुलिस की मैच फिक्सिंग की थ्योरी पर ही सवाल उठाए थे। पुलिस ने अारोपियों पर धोखाधड़ी, साजिश और मकोका के तहत केस किया था। बाद में पुख्ता सबूत नहीं होने के आधार पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। फिर आरोप तय करने से इनकार करते हुए बरी कर दिया।



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