महज 'तीन तलाक' बोलने से खत्म नहीं किए जा सकते महिलाओं के अधिकार : खुर्शीद - RNews1 Hindi Khabar

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महज 'तीन तलाक' बोलने से खत्म नहीं किए जा सकते महिलाओं के अधिकार : खुर्शीद

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जयपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि महज 'तीन तलाक' बोलने भर से महिलाओं के अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता है। सलमान खुर्शीद आज जयपुर मे आयोजित किए जा रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 11वें संस्करण में हिस्सा लेते हुए अपनी बात कह रहे थे। सलमान यहां तीन तलाक के विषय लिखी अपनी बुक को लॉन्च कर रहे थे। वहीं इस फेस्टिवल के बारे में सलमान ने जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह साहित्य का ऐसा मंच है, जहां सबको अपनी राय रखने की छूट होती है।

वहीं मीडिया से बात करते हुए सलमान ने कई मामलों को लेकर खुलकर चर्चा की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर फिल्म पद्मावत के बारे में अपने विचार रखे। राजधानी दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में खुर्शीद ने कहा कि सत्ता पक्ष द्वारा विपक्ष के सबसे ताकतवर इंसान को इस तरह से नजरअंदाज किया जाना बिल्कुल भी सही नहीं है। वहीं मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सलमान ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार का यही असली लोकतंत्र है।


वहीं संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को लेकर मचे बवाल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि, जिस तरह से सबके पास अभव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, उसी तरह से हर किसी के पास विरोध किए जाने का भी अधिकार है। लेकिन विरोध में किसी भी तरह से हिंसा या तोड़फोड़ किया जाना बिल्कुल भी सही नहीं है। फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है, उस पर भी किसी फिल्म को प्रमाणित करने का अधिकार प्राप्त सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म में आवश्यक बदलाव के साथ फिल्म को पास किया है। फिर भी किसी को आपत्ति​ है तो उसका विरोध एक सीमा और कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।

इस दौरान सलमान में तीन तला​क के विषय पर लिखी गई उनकी पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि इस बुक में मैंने तीन तलाक और उस पर सुप्रीम कोर्ट में चले मसले के साथ ही लोकसभा—राज्यसभा में चले पूरे प्रकरण के बारे में विस्तार से लिखा है, जिससे तीन तलाक को आसानी से समझा जा सकता है। वहीं उन्होंने कहा कि महज 'तीन तलाक' कह देने भर से किसी भी महिला के अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता है।


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