मुख्यमंत्री आसमान से तारे भी तोड़ लाती तो भी प्रदेशवासियों का मन बदलने वाला नहीं : अशोक गहलोत - RNews1 Hindi Khabar

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मुख्यमंत्री आसमान से तारे भी तोड़ लाती तो भी प्रदेशवासियों का मन बदलने वाला नहीं : अशोक गहलोत

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में आज मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा पेश किए गए राजस्थान बजट 2018-19 पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल उठाए हैं। गहलोत ने इस बजट को महज घोषणाओं का पुलिन्दा बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान में तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में भारी पराजय के बाद मुख्यमंत्री आसमान से तारे भी तोड़ लाती तो भी प्रदेशवासियों का मन बदलने वाला नहीं है। इस सरकार की विदाई अब तय है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारी बहुमत के बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार के कुशासन से चार साल तक त्रस्त रहने के बाद उपचुनावों में जनता ने अपना आक्रोश व्यक्त किया है। अब जो घोषणाएं की गई हैं, उन्हें मात्र 8 महीने के कार्यकाल में पूरा कर देने का जो छलावा किया गया है, उसे सब समझते हैं। ऐसे में राज्य का यह बजट महज घोषणाओं का पुलिन्दा है।

गहलोत ने कहा कि हाल ही राजस्थान के अजमेर, अलवर और मांडलगढ़ सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री अगर आसमान से तारे भी तोड़ कर ले आती तो भी प्रदेशवासियों का मन बदलने वाला नहीं है। इस सरकार की विदाई तय है। उन्होंने कहा कि बजट में सरकार ने किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी की बजाय सिर्फ 50 हजार रुपए तक का ही कर्ज माफ किया है। समर्थन मूल्यों को तर्कसंगत बनाने का बजट में रोड मैप का कोई जिक्र नहीं कर किसानों के साथ छलावा किया है।

उन्होेंने कहा कि, पेट्रोल एवं डीजल पर टैक्स में कोई कमी नहीं कर महंगाई से त्रस्त आमजन को कोई राहत नहीं दी गई है। सबसे बड़ा छलावा युवा वर्ग के साथ किया गया है। चार वर्ष के कार्यकाल में भाजपा की सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई भर्तियों तक को नहीं भर पाई है और न ही खुद कोई भर्तियां कर पाई है। संविदाकर्मियों के लिये कोई घोषणा न कर सरकार ने उनके साथ कुठाराघात किया है। बजट से राज्य के कर्मचारी वर्ग को भी पूरी तरह से निराशा हाथ लगी है।



वहीं इस बजट को दिशाहीन बताते हुए उन्होंने कहा कि, दिशाहीन इस बजट में घोषणायें ऐसी हैं, जिन्हें आने वाले कई सालों में भी पूरा करना सम्भव नहीं है, मगर मुख्यमंत्री ने गुमराह करने के लिये बजट के जरिये कुचेष्टा की है। रिफाइनरी को लेकर नये एमओयू में 40 हजार करोड की बचत करने की बात कही गई है, जबकि असल में सिर्फ ब्याजमुक्त ऋण कम हुआ है। इसके विपरीत लागत में छह हजार करोड की बढ़ोतरी हुई है।

रिफाईनरी कम पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स तथा सहायक उद्योग-धन्धे लगने से प्राप्त होने वाले रोजगार, आर्थिक विकास एवं राजस्व आय से चार साल तक प्रदेश को वंचित करने का जो पाप इस सरकार ने किया है, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी। जयपुर मेट्रो, डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल्वे लाईन, परवन सिंचाई एवं पेयजल परियोजना, मेमू कोच फैक्ट्री आदि महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में बजट में कोई चर्चा तक नहीं की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट पर निशाना साधते हुए कहा कि, कहने को तो बजट में कोई नया कर नहीं लगाने की बात कही गई है, लेकिन सच्चाई यह है कि जीएसटी में सभी वस्तुओं को पहले से ही कर के दायरे में लिया जा चुका है। नये कर लगाने का अधिकार अब तो वैसे भी राज्य सरकार के पास नहीं है।


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