भारत बंद : जानिए, आखिर कहां से शुरू हुआ विवाद और क्या थे SC/ST act पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश - RNews1 Hindi Khabar

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भारत बंद : जानिए, आखिर कहां से शुरू हुआ विवाद और क्या थे SC/ST act पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश

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जयपुर। हाल ही में SC/ST act से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इस एक्ट में संशोधन के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ और देश के तमाम राज्यों में दलित संगठन इसके विरोध में लामबंद हो गए। कोर्ट के आदेश के खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को न सिर्फ भारत बंद का आह्वान कर बंद कराया, बल्कि पूरे देश से बंद के दौरान जमकर तोड़फोड़, आगजनी और हिंसक झड़पों के साथ ही जनहानि की भी खबरें सामने आई है।

दलित संगठनों की ओर से आहूत किए गए भारत बंद को लेकर देशभर के बाजारों में न सिर्फ सन्नाटा पसरा रहा, बल्कि प्रदर्शनकारियों का हुड़दंग भी जमकर नजर आया। जबरन कराए गए इस बंद में भले ही लाठी के जोर पर दुकानों को बंद कराया गया हो, लेकिन बंद के लिहाज से ये भारत बंद अभूतपूर्व भी नजर आया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ बाजारों को बंद कराया, बल्कि कई स्थानों से दुकानों में तोड़फोड़ के साथ ही लूटपाट की भी खबरेें आई है। वहीं कई जगहों पर वाहनों को आग के हवाले भी कर दिया।



सबसे हैरत की बात तो ये रही कि कई स्थानों पर जहां वाहनों में तोड़फोड़ की जा रही थी, वहां पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकने में कामयाब नहीं हो सके। हालांकि ये पुलिसकर्मी कामयाब तो तब हो सकते थे, जब वो प्रदर्शनकारियों को ऐसा करने से रोकते, लेकिन अफसोस की बात तो यही है कि उन्होंने ऐसा करने की जहमत ही नहीं उठाई। तो ऐसे में भला कौनसा प्रदर्शनकारी रुकने वाला था। शह मिली और हौसले परवान पर, बस फिर क्या था। जो दिखा हत्थे चढ़ गया।

खैर, इन सब बातों से इतर, सबसे महत्वपूर्ण बात ये जानना है कि आखिर ये पूरा माजरा है क्या, जिसे लेकर पूरे देशभर में कोहराम मचा और इस पूरे मसले से किसी भी तरह से कोई सरोकार तक नहीं रखने वाले कई लोगों को इस बंद का खामियाजा अपने वाहनों में तोड़फोड और उन्हें आग में जलता देखकर उठाना पड़ा। चलिए, अब ये जानते है कि ये पूरा मसला आखिर शुरू कहां से हुआ और कैसे भारत बंद तक पहुंच गया। 



यहां से शुरू हुआ पूरा मसला :
* दरअसल, महाराष्ट्र में एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक शख्स ने वहीं के एक सरकारी अधिकारी सुभाष काशीनाथ महाजन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शख्स ने अपनी शिकायत में महाजन पर अपने ऊपर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दो जूनियर एंप्लॉयीज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाने का आरोप लगाया था।


* याचिकाकर्ता का कहना था कि उन दो एंप्लॉयीज ने उन पर जातिसूचक टिप्पणी की
थी। शिकायत में उसने बताया कि गैर एसटी के इन दोनों अधिकारियों ने उस व्यक्ति की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में उसके खिलाफ टिप्पणी की थी।

* जब मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनके वरिष्ठ अधिकारी से इजाजत मांगी तो इजाजत नहीं दी गई। इस पर उनके खिलाफ भी पुलिस में मामला दर्ज कर दिया गया।

* काशीनाथ महाजन ने अपने खिलाफ दायर की गई एफआईआर को खारिज कराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया, जिस पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी अपील को ठुकरा दिया।

* बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद महाजन ने सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन पर एफआईआर हटाने का आदेश देते हुए SC/ST act के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक का आदेश दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत दिए जाने को भी मंजूरी दी थी। 



ये था SC/ST act पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला :
सुप्रीम कोर्ट ने महाजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए SC/ST act में तत्काल गिरफ्तारी किए जाने के प्रावधान को खत्म करने का आदेश दिया था। इसके अलावा act के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत दिए जाने को भी मंजूरी दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में तुरंत होने वाली गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और उसके बाद एक्शन लिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी उसकी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती है। वहीं गैर-सरकारी कर्मी की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की मंजूरी लिया जाना आवश्यक होगा।

बस यहीं से इस मसले की चिंगारी को हवा मिली और पूरे मामले ने तूल पकड़कर देशभर तक अपनी पहुंच बना ली। इसके बाद शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला। इसके बाद दलित संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इस मसले पर केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर सरकार इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी।


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