कम वर्षा से जल संकट, जिला प्रशासन की अपील संभल कर खर्च करें पानी - RNews1 Hindi Khabar

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कम वर्षा से जल संकट, जिला प्रशासन की अपील संभल कर खर्च करें पानी

अजमेर। इस मानसून में औसत से कम एवं छितरायी हुई बारिश के कारण बीसलपुर बांध में सामान्य से कम पानी आया है। कम पानी की आवक से उपजे पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर ली है। इसके लिए इस योजना पर त्वरित गति से काम भी शुरू कर दिया गया है। जिले को शीघ्र ही योजना का लाभ भी मिलने लगेगा। आमजन को भी पेयजल संकट के इस दौर में जल मितव्ययता अपनाकर सहयोग करना होगा।
   
जिला कलेक्टर आरती डोगरा की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में बीसलपुर बांध में पानी की कम आवक होने से उत्पन्न जल संकट पर जलदाय विभाग द्वारा तैयार कार्ययोजना पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों, स्वयंसेवी संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध व्यक्तियों से चर्चा कर उनके सुझाव भी लिए गए। बैठक में जल मितव्ययता एवं बेहतर प्रबंधन के लिए आमजन में अधिक से अधिक जागरूकता उत्पन्न करने तथा प्रचार -प्रसार करने पर भी सहमति बनी।
   
बैठक को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर आरती डोगरा ने कहा कि कम वर्षा के चलते जिले में आने वाले समय में पानी की गंभीर समस्या रहेगी, इसका मुकाबला करने के लिए सभी को जल संरक्षण पर ध्यान देना होगा। पानी वितरण में बीस प्रतिशत कटौती करने पर बीसलपुर में आगामी फरवरी माह तक का ही पानी शेष है । इसके लिए जल का उपयोग मितव्ययी रूप से किया जाये। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को इस संबंध में स्वयं जागरूक होना पड़ेगा।
   
जिला कलक्टर ने जलदाय अभियंताओं को भी निर्देशित किया कि वे पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष प्रभावी रूप से स्थापित करें। साथ ही लीकेज संबंधी शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जायें। पेयजल वितरण की समय सारिणी का समाचार पत्रों में प्रकाशन हो साथ ही पेयजल वितरण रात्रि दस बजे के पश्चात नहीं किया जायें।
   
बैठक को संबोधित करते हुए महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने कहा कि बांध में जिस प्रकार सिंचाई के लिए सीमा का निर्धारण कर दिया गया है उसी प्रकार एक निश्चित सीमा तक पानी का स्तर आने पर वह जिले के लिए आरक्षित कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेयजल में जो भी कटौती की जानी है एक बार कर दी जाये। इसके साथ ही पेयजल वितरण का अंतराल समय भी निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने भांवता, गनाहेडा सहित स्थानीय पेयजल के पुराने स्त्रोत डिग्गी तालाब की भी सफाई करवा उसका उपयोग करने का भी सुझाव दिया।
   
बैठक में संपादक दीनबंधू चौधरी ने पेयजल वितरण की प्रभावी मोनिटरिंग किये जाने पर जोर देते हुए कहा कि पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग पांच सौ हैण्डपंप लगाये गये थे जो विद्युतीकृत थे। उन्हें पुनः प्रारंभ किया जाकर उन पर यदि आरओ लगा दिये जाये तो ग्रामीण जनता को पेयजल की काफी राहत मिलेगी। उन्होंने भांवता एवं बुढ़ा पुष्कर के पेयजल स्त्रोत को संधारित करने की भी आवश्यकता प्रतिपादित की।
   
इस मौके पर यूनाईटेड अजमेर की कीर्ति पाठक, राजस्थान महिला कल्याण मंडल की क्षमा काकड़े, डॉ. मीनल खासगीवाल, पार्षद जे.के. शर्मा, दिलीप शर्मा, भूपेन्द्र सिंह, पत्रकार गिरीश दाधीच, अशोक भाटी, नवाब हिदायतुला सहित विभिन्न स्वयं सेवी संगठन के प्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी जल संरक्षण के लिए अपने सुझाव दिये।

बैठक में जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता सत्येंद्रसिंह ने बताया कि अजमेर शहर को 125 एमएल के स्थान पर 20 प्रतिशत कटौती के पश्चात 100 एमएल पानी मिल रहा है। 125 एमएल पानी मिलने की स्थिति में 48 घण्टे के अन्तराल से अजमेर शहर में पानी सप्लाई किया जा रहा है। वर्तमान में अजमेर शहर से विभाग के 9 उपखण्डों द्वारा पानी वितरण का कार्य किया जाता है। रोजाना 100 एमएल पानी से भी सप्लाई अन्तराल 48 घण्टे ही रखा जाना प्रस्तावित है किन्तु रोजाना प्रत्येक 2 उपखण्ड के क्षेत्र में एक दिन सप्लाई बन्द रहेगी।

इस प्रकार अजमेर शहर में 2 सप्लाई 48 घण्टे के अन्तराल से एवं तीसरी सप्लाई 72 घण्टे के अन्तराल से पूर्व की भांति निर्धारित समय पर 50 मिनट के लिये की जावेगी और यही क्रम आगे लगातार जारी रहेगा।

अजमेर शहर में पेयजल संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत संबंधित उपखण्ड कार्यालयाें में एवं विभागीय कन्ट्रोल रूम फोन नं. नल गोदाम 2628489 एवं अलवरगेट 2660943 अथवा विभागीय कॉलसेन्टर फोन नं. - 18001806088 पर दर्ज करवाई जा सकती है।

जिला कलक्टर ने की आमजन से अपील, अपनाएं जल संरक्षण के उपाय
जिला कलक्टर आरती डोगरा ने आमजन से अपील की है कि पेयजल संकट से उबरने के लिए सभी कम पानी खर्च करें। इस मानसून में औसत से 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। जिले का प्रत्येक नागरिक इस बात का प्रण करे कि वह अगले मानसून तक प्रतिदिन जल बचाएगा।
   
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जल के कम से कम उपयोग के बारे में जागरूक हो। बर्तन धोने, आंगन धोने, शौचालय में उपयोग, रसोई में उपयोग एवं अन्य उपयोगों में मितव्यतता बरत कर हम जल संरक्षण में सहयोग कर सकते है। जिन संस्थानों एवं भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है, वहां उस पानी का उपयोग किया जाए। हम यह तय कर लें कि कम पानी की उपलब्धता के कारण हम जल बचाकर अपने कर्तव्य का निवर्हन करेंगे।
   
उन्होंने आमजन, विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों तथा मीडिया से आग्रह किया कि जल संरक्षण के उपायों तथा जागरूकता के प्रति ज्यादा से ज्यादा प्रचार -प्रसार करें ताकि हम इस संकट से बाहर आ सके। व्यर्थ पानी नहीं बहेगा तो प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास सार्थक होंगे।

यह है आपदा प्रबंधन योजना
जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 923 एमएलडी पानी की आपूर्ति प्रतिदिन की जा रही है। यह जारी रहे तो बांध में सिर्फ 28 फरवरी 2019 तक का जल उपलब्ध है। विभाग ने 20 प्रतिशत कटौती कर 689 एमएलडी जलापूर्ति प्रतिदिन करना तय किया है। इससे 15 अप्रेल 2019 तक जल उपलब्धता रहेगी। इसी तरह  आगामी दिनों में 50 प्रतिशत कटौती की योजना है। बांध से 450 एमएलडी पानी आपूर्ति होने पर 31 जुलाई तक पेयजल की उपलब्धता रहेगी।
   
उन्होंने बताया कि जिले में पेयजल के वैकल्पिक स्त्रोतों को तैयार करने के लिए जलदाय विभाग ने 189.61 करोड़ की योजना तैयार की है। इससे प्रतिदिन 68 एमएलडी पानी उपलब्ध हो सकेगा। विभाग आगामी तीन महीनों में 498 सिंगल फेस ट्यूबवेलो को पुन शुरू करेगा। जो अब तक बंद पड़े थे। इस पर 7.52 करोड़ रूपए खर्च होंगे। इसी तरह 16.1 करोड़ की लागत से 1516 नए हैण्डपम्प खोदे जाएंगे। इस काम में 4 महीने लगेंगे। इसी तरह 88.75 करोड़ की लागत से 410 नए खुले कुओं एवं ट्यूबवैलों का निर्माण आगामी 4 माह में कराया जाएगा। विभाग ने आगामी 2 महीनों तक 19.73 करोड़ की लागत से निजी स्त्रोतों से टैंकरों द्वारा जल परिवहन तथा 57.60 करोड़ की लागत से 2 महीने में ट्रेन से जल परिवहन की योजना तैयार कर ली है।
   
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में तीन बार जलापूर्ति की जाएगी। अजमेर शहर में जलापूर्ति के लिए 48 एवं 72 घण्टे के चक्र तैयार किए गए हैंं। इसके तहत एक स्थान पर 2 बार 48 घण्टों एवं तीसरी बार 72 घण्टे में जलापूर्ति की जाएगी। इसके पश्चात पुनः दो बार 48 व तीसरी बार 72 घण्टे के चक्र लागू होंगे। यह सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू किया जाएगा। जलापूर्ति एक घण्टे तक पूरे प्रेशर के साथ की जाएगी।




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