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अब तक 1 हजार से ज्यादा लोगों को ठग चुके ये तीन शातिर, आखिरकार चढ़े पुलिस के हत्थे

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर देशभर में एक हजार से ज्यादा लोगों को ठगने वाले तीन बदमाशों को दबोचा है। इन तीनों ने लोगों से एक नामी मोबाइल कंपनी के टावर लगाने का झांसा देकर करीब 1.50 करोड़ रुपए ठगे हैं। पुलिस ने बुधवार को कहा कि ये ठग लोगों को प्रतिष्ठित कंपनियों के मोबाइल टावर लगवाने के नाम पर ठगते थे। आरोपियों की पहचान संजय कुमार (28), संतोष कुमार (29) और अर्जुन प्रसाद (26) के रूप में हुई है।

पुलिस ने कहा कि तीनों ने पीड़ितों के साथ फर्जी वेबसाइट के जरिये धोखाधड़ी की। उन्होंने कहा कि संजय ने ठगी से जुटाई गई रकम में से कुछ का इस्तेमाल संजय इंटरप्राइजेज के नाम से खुद की क्लाउड टेलीफोनी कंपनी खोलने के लिये किया। पुलिस ने जब संपर्क किया तो कम से कम 200 लोगों ने स्वीकार किया कि आरोपियों ने उन्हें ठगा है। पुलिस उपायुक्त (द्वारका) अंतो अलफोंस ने कहा कि डाबड़ी में रहने वाले लोकेंद्र कुमार नाम के एक पीड़ित ने अपनी शिकायत में कहा कि उसने www.reliancejiotower.net नाम की एक वेबसाइट इंटरनेट पर देखी, जिसमे मोबाइल टावर लगाने का दावा किया गया था।

पुलिस ने कहा कि वेबसाइट पर दिये मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने और टावर लगवाने के लिए फॉर्म भरवाने के बाद उसे एक ईमेल मिला, जिसमें ‘टावर लगाने की मंजूरी का पत्र’ था। डीसीपी ने कहा कि इसके बाद तीनों ने कुमार से टावर लगाने के बदले 14,413 रुपए की जमानत राशि की मांग की, जिस पर कुमार ने यह रकम जमा करा दी। रकम जमा कराने पर कुमार के पास बैंक से संदेश आया कि उसके खाते से रकम अर्जुन प्रसाद के बैंक खाते में भेजी गई है। इस पर कुमार को शक हुआ। उसने जब तीनों से रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने इससे इनकार कर दिया।


बाद में कुमार की शिकायत पर पुलिस ने शिकायत दर्ज की और ठगी के इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ। बैंक खाता फर्जी पते पर खुलवाया गया था। इस दौरान पुलिस ने उनकी रजिस्ट्रेशन डिटेल, आईपी लॉग और भुगतान का माध्यम देखा तो सारी बात समझ में आ गई। उनका सब कुछ फर्जी था और वे तेजी से फंड्स को अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। बैंक खाता भी नकली पता देकर खुलवाया गया था। पुलिस ने मानेसर और फरीदाबाद में छापामारी करके संतोष कुमार और अर्जुन प्रसाद को धर दबोचा। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीसरे आरोपी और ठगी के मास्टरमाइंड संजय को नालंदा से दबोचा।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि संजय क्लाउड टेलिफोनी नाम से अपनी कंपनी खोलना चाहता था, जिसके लिए मोटी रकम की जरूरत थी। उसने 12वीं की पढ़ाई के बाद आईटी में डिप्लोमा में किया था और कई सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम करने के बाद उसे तकनीक की काफी जानकारी हो गई थी। उसने फर्जी वेबसाइट बनाई और फर्जी नंबर डाले। इस वेबसाइट पर ग्राहकों द्वारा पूछे जाने वाले सभी संभावित प्रश्नों के उत्तर वाइस आर्टिस्ट से रिकॉर्ड करवाकर दर्ज कराए गए और जब भी कोई ग्राहक उन नंबरों पर बात करता तो कंप्यूटराइज सिस्टम पूछे गए सवालों के सही जवाब देता था, जिससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। अर्जुन और संतोष, संजय को लोगों के बैंक खातों की जानकारी 10-15 प्रतिशत की कमीशन के आधार पर देने का काम करते थे।

यह गिरोह अब तक देश के विभिन्न राज्यों में एक हजार से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका है। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए फर्जी वेबसाइट का प्रयोग करते थे, जिसे इन्होंने सॉफ्टवेयर की उन्नत तकनीक से भरा हुआ था, जिससे वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर कॉल करने वाले पीड़ित लोगों को जरा भी शक नहीं होता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, नौ सिम कार्ड और 12 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।


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