शरीर का चैकीदार फेफड़ों को कहा जाता है वैसे ही समाज का चैकीदार पत्रकार है : डॉ प्रमोद दाधीच - RNews1 Hindi Khabar

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शरीर का चैकीदार फेफड़ों को कहा जाता है वैसे ही समाज का चैकीदार पत्रकार है : डॉ प्रमोद दाधीच

अजमेर। विश्व अस्थमा दिवस 7 मई के अवसर पर  अजयमेरु प्रैस क्लब के सदस्यों व परिवारजनों के लिए रविवार 5 मई 2019 को मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, पुष्कर रोड अजमेर के सभागार में आयोजित निःशुल्क अस्थमा, एलर्जी, स्लीप व श्वास रोग जांच व परामर्श शिविर में डेढ़ सौ से अधिक महिलाओं व पुरुषों ने लाभ उठाया।

मित्तल हाॅस्पिटल अजमेर के पल्मनोलाॅजिस्ट डाॅ. प्रमोद दाधीच ने पंजीकृत सदस्यों को पावर प्रजेंटेशन के जरिए श्वास रोगों संबंधित परिचर्चा करते हुए बताया कि सकारात्मक पत्रकारिता समाज में परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे अपने लेखन से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करें, जिससे अस्थमा व श्वास संबंधित रोगों से लोगों को बचाया जा सके। डॉ दाधीच ने बताया कि अस्थमा व सीओपीडी से होने वाली मौतों में राजस्थान देश में नम्बर एक पर है।  राजस्थान में हर तीन व्यक्तियों पर एक व्यक्ति अस्थमा व श्वास रोग से पीड़ित है। राजस्थान में प्रति एक लाख में करीब साढ़े चार हजार लोग अस्थमा से ग्रसित होते हैं। विश्व में भारत सीओपीडी ग्रसित रोगियों में प्रथम स्थान पर है। अकेले भारत में सीओपीडी की वजह से मृत्यु दर 213 प्रति एक लाख है। यह आंकड़े इस रोग की गंभीरता को दर्शाते हैं। इसलिए इसके प्रति जागरुकता की जरूरत हैं।

डॉ दाधीच ने अस्थमा व श्वास रोग के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे घरों के आसपास उगने वाली गाजर घास, बंदर की रोटी, विलायती बबूल के कारण श्वास रोग होते हैं। नालियों व नालों में जमने वाली काई के कारण फंगल संक्रमण, श्वास व एलर्जी की बीमारी होती है। घरों में पालतू जानवर, रुई के बिस्तर, साफ सफाई का अभाव, घर की नालियों में कोकरोज आदि कई अंदरुनी व बाहरी कारण हैं।
डॉ दाधीच ने कहा कि जैसे शरीर का चैकीदार फेफड़ों को कहा जाता है वैसे ही समाज का चैकीदार पत्रकारों को कहा जाता है। समाज का चैकीदार सकारात्मक होकर समाज को स्वस्थ्य रखने की दिशा में लेखन करेगा तो निश्चित ही परिवर्तन आएगा।

डॉ प्रमोद दाधीच ने इस मौके पर स्लीप एप्निया व अन्य श्वास रोग व खर्राटें संबंधित रोगों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने बताया कि श्वास नलियों के सिकुड़ने के कारण खर्राटे आते हैं किन्तु सभी इसे समान्य मानते हैं जबकि यह स्थिति गंभीर रोग का संकेत है। डॉ दाधीच ने कहा कि हमें यह ध्यान रखना है कि स्वयं के डाक्टर ना बने। श्वास व अस्थमा रोगी स्वयं के डाक्टर बन जाते हैं। वे जरा से ठीक महसूस करते ही दवाइयों का सेवन बंद कर देते हैं अथवा बार बार अपनी दवाइयां बदल लेते हैं। उन्होंने कहा बाजार में अनेक दवाइयां उपलब्ध हैं, सही दवाई का चयन जरूरत है। इसके लिए सही डाक्टर की सलाह होनी चाहिए। डॉ दाधीच ने सभी को सलाह दी कि  अपने घर के चैकीदार की सजकता को जैसे कभी कभी जांचा जाता है वैसे ही कभी कभी शरीर के चैकीदार की भी यानी फेफड़ों की भी जांच कराई जाती रहनी चाहिए। डॉ दाधीच ने बताया कि एक स्वस्थ्य फेफड़ों में 350 लीटर आक्सीजन प्रति 24 घंटे में आतीकृजाती हैं। 10 हजार लीटर हवा का आना जाना होता है तथा 10 हजार लीटर खून आता जाता है। जिस तरह चाय छानने की छलनी में रुकावट आने पर चाय नहीं छानी जा सकती इसी तरह फेफड़ों में रुकावट से शरीर को पर्याप्त आक्सीजन व खून की सप्लाई बाधित हो जाती है। जो शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाती है।

स्टॉप फार अस्थमा जागरुकता वॉक आजकृ
 डॉ दाधीच ने बताया कि डब्ल्यू एच ओ ने इस बार वल्र्ड अस्थमा दिवस की थीम ‘‘स्टाॅप फार अस्थमा’’ रखी है। यहां स्टाॅप के मायने एस-लक्षण मूल्यांकन, टी-परीक्षण प्रतिक्रिया, ओ-निरीक्षण करें और आकलन करें, पी- उपचार के लिए आगे बढ़ें है। उन्होंने बताया सोमवार को सुबह साढ़े छह बजे मित्तल हॉस्पिटल प्रांगण से शहर के एक सौ से अधिक चिकित्सक जागरुकता वॉक करेंगे। यह वॉक मित्तल हॉस्पिटल से माहेश्वरी पब्लिक स्कूल होते हुए यू टर्न कर वापस मित्तल हॉस्पिटल आकर समाप्त होगी।

इससे पहले हॉस्पिटल के प्रबंधक जनसम्पर्क सन्तोष गुप्ता ने शिविर के आयोजन की भूमिका पर प्रकाश डाला। अजयमेरु प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेश कासलीवाल सहित कार्यकारिणी के सदस्यों का स्वागत किया।

शिविर में यह मिला निःशुल्क लाभ :
शिविरार्थियों को हाॅस्पिटल की डायटीशियन नौशिना खान द्वारा पोषाहार की सलाह दी गई। फिजीयोथैरेपिस्ट द्वारा श्वास रोग संबंधी योगा-प्रणायाम समझाया जाएगा। इसके अतिरिक्त शिविर में आने वालों की लम्बाई, वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, पीक फ्लो मीटर द्वारा फेफड़ों की जांच, कम्प्यूटर द्वारा फेफड़ों की स्पायरोमिट्री जांच, स्मोक चेक मीटर द्वारा फेफड़ों की जांच निःशुल्क की गई। हॉस्प्टिल प्रबंधन की ओर से चिकित्सक द्वारा अन्य किसी तरह की जांच व प्रोसीजर्स की सलाह दिए जाने पर अगले एक सप्ताह तक जांचों पर 25 प्रतिशत तक तथा प्रोसीजर्स पर 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई।

हॉस्पिटल प्रबंधन का जताया आभार
अंत में प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेश कासलीवाल ने मित्तल हॉस्पिटल के निदेशक सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल एवं मनोज मित्तल तथा उपाध्यक्ष श्याम सोमानी का आभार व्यक्त किया उन्होंने पत्रकार साथियों एवं उनके परिवारजनों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच व परामर्श शिविर का आयोजन किया। कासलीवाल ने कहा कि पत्रकार साथी स्वयं के शरीर का तो ख्याल नहीं रख पाते खबरों के संकलन की दौड़धूप में तनावग्रस्त रहते हैं ऐसे में परिवारजन की चिंता का भी कारण बन जाते हैं आज परिवारजन का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराकर चिंता मुक्त हुए यह सबसे अच्छा रहा।



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